Indian misael भारत ने बनाया ऐसा एक मिसाइल जिससे सारे देश की लोग कहां पर रहे हैं जिससे चीन पीछे रह गया और अमेरिका भी

नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप

नया दिल्ली : भारत की प्रतिरक्षा की रचना केंद्र में विकास किया गया डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया एक अस्त्र यह युद्ध के लिए काम आएगा इस हिसाब से यह बनाया गया है यह राजनीतिक तौर पर नहीं बनाएगा इसलिए इस मिसाइल का नाम गांधी में रखा गया जो की महाभारत की अर्जुन की धुन की नाम है इसलिए इस अस्त्र का नाम गांडीव के प्लास्टर रखा गया 21 शताब्दी में भारत को यह नया उच्चतर तक ले जाएगा इसलिए यह केवल एक मिसाइल नहीं बरम यह भारत का वायु सुरक्षा में एक बड़ी बात है

यह एक बड़ी गति एवं शक्ति को संरचना कर सकता है यह चीन एवं अमेरिका जैसे महाशक्ति मिसाइल से भी आगे जा सकता है विशेष तौर पर यह ध्यान विजुअल रेंज यानी और तू और मिसाइल यह मिसाल जैसा मिसाल कोई देश में नहीं लेकिन है कुछ देशों में है लेकिन हर देश में नहीं है इसमें शायद इस मिसाइल दिया वीडियो द्वारा बनाया गया है गांधीब है जिसका नाम श्री अर्जुन की धुन के नाम पर रखा गया इसका विशिष्ट चाहिए यह है कि यह बहुत दूर तक आक्रमण कर सकता है इसमें सेल एक्स्ट्रा MK3 प्रकल्प अधीन में विकसित किया गया है भारतीय वायुसेना आयोग के लिए एक गुरुत्व ने संपत्ति है जो 340 किलोमीटर तक और इसका इंजन इसका इंजन 12 फ्यूल डॉक्टर राजजात यह शत्रु की लाडवा विमान बम बरसी विमान कारक और वस विमान से टारगेट कर सकता है जिस टाइम पर इसे 20 किलोमीटर लॉन्च किया जाए इसका परिषद 340 किलोमीटर पर एजेंट पहुंच सकता है इस समय में जब 8 किलोमीटर लॉन्च किया गया था तो 190 किलोमीटर बुद्धि का आगे पहुंच गया था इससे चैनल PL 15 मिसाइल 300 किलोमीटर एवं अमेरिका AIM- 174 BVRAAM 240 किलोमीटर तक पहुंच जाता है

गांधी मिसाइल बनाया गया ग्वाल फ्यूल डिटेक्ट राम जेट इंजन से मिसाइल का भी प्रत्येक भाग में कुछ अलग-अलग सिस्टम इसे कुछ अलग-अलग ईंधन के द्वारा अतिक्रमण किया गया संख्यता और कुछ अलग से सपोर्ट इसमें दौड़ता और उच्च गति और अपने लक्ष्य तिलक को आक्रमण करने के लिए सही ठिकाना और इसमें सही हिंदी में संचय कर पाना और ज्यादा से ज्यादा दूर तक आक्रमण कर पाना इससे इसका खासियत है उसका गुरुत्व में बाद भी यही है कि इसका उच्चता और मिशन के लिए यह बहुत उपयुक्त हो सकता है क्योंकि इसमें सेल का नाम है गांधी जी से अर्जुन का जैसा उसका तीर एक ही जगह पर लगता है इस तरह रणनीति के यार नियंत्रण के लिए एक ऐसा चीज है

भारत जुलाई 11 तारीख में अष्टयाम के वन बनाया उसका सफल परीक्षण किया था इसके बाद बंगापसागर में सुखी 30 एम के आई विमान से कराया गया था की परीक्षा की पता लगता है कि भारत अभियान विजुअल रंगे मिसाइल विद्या में आत्मनिर्भारशीला हो चुकी है अब lcmk1 ए अर्थात स्वदेशी तेज लाडवा विमान एक उन्नत स्मरण एक्स्ट्रा मिसाइल्स द्वारा सज्जित यह भारत इससे पता चलता है कि भारत एक आत्मनिर्भर प्रतिरक्षा नीति बना चुकी है क्योंकि यह एक प्रमुख सफलता हासिल कर चुकी है

भारत में और भी कुछ-कुछ मिसाइल सिस्टम ऑरेंज किया जा रहा है और इस टेस्ट भी किया जा रहा है जो आगे आत्मनिर्भारशीला भारत खुद का मिसाइल बनाकर खुद को स्ट्रांग बनाने में सक्षम हो रहा है इस चीज को आगे तक जाने के लिए हमारी साइड से जुड़े रहे हैं धन्यवाद

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